Wednesday, June 20, 2018

Teri Yaadon ka Samaa - यादों का समां


तेरी यादों का ऐसा समां होता है,
तकिये में तेरी गोद का गुमा होता है |

सोता हूँ तो लगता है कि तुम पास मेरे हो,
खुलती है जब नींद तो कोई कहाँ होता है |

ठगा सा रह जाता हूँ अपने अकेलेपन में, 
आँखों से छलकता है जो दिल में जमा होता है| 

ढूंढता हूँ मैं तुझको हर उस जगह पे जाकर, 
जहाँ भी तेरे होने का निशां होता है| 

काश! कि तुम लौट आओ फिर से वापस, 
पर ख्वाब पूरा हर कोई कहाँ होता है ||

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