तेरी यादों का ऐसा समां होता है,
तकिये में तेरी गोद का गुमा होता है |
सोता हूँ तो लगता है कि तुम पास मेरे हो,
खुलती है जब नींद तो कोई कहाँ होता है |
ठगा सा रह जाता हूँ अपने अकेलेपन में,
आँखों से छलकता है जो दिल में जमा होता है|
ढूंढता हूँ मैं तुझको हर उस जगह पे जाकर,
जहाँ भी तेरे होने का निशां होता है|
काश! कि तुम लौट आओ फिर से वापस,
पर ख्वाब पूरा हर कोई कहाँ होता है ||
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