Monday, May 7, 2018

Bachpan Ki Mohabbat - बचपन की मोहब्बत



एक कली गुलाब की

खुशबू चुरा ले गयी हवा

आके मेरे दर पे बोली

मेरे संग तेरी जानेजां

चौंक गया मैं एक पल को

सुनकर उसकी दास्ताँ

कहने लगी ये है वही

जिसकी तुझे तलाश है

दिल में ख़्वाहिश दीदार की

नैनो को जिसकी प्यास है

छुपा दिल में सीने से लगा

दुनिया की इस पर नज़र

खिल गई वक़्त से पहले

तेरे प्यार का है असर

देखा नज़र भर कर मैंने

पहचान गया था उसको मैं

वो प्यार था मेरे अब्च्पन का

भूल गया था जिसको मैं

मुतमईन हो गया था

मैं उस झोंके के सामने

बसा लिया था उस खुशबू को

मैं अपनी सांस में

तब से मेरे दिल में

सिर्फ उसका ही चेहरा है

उसे भुला नहीं पाऊँगा कभी

मेरा प्यार बहुत ही गहरा है।

No comments:

Post a Comment