फिर किसी विदेशी गुलामी को
न स्वकार करो,
विदेशी सीख सीख कर न
राष्ट्र का अपमान करो।
दिलों में प्रेम का सागर
दोस्ती का प्रवाह करो,
छोड़ो दूसरी शक्ति को अपने
राष्ट्र की पूजा करो,
सर्वसम्पन्न,
शक्ति मान, सर्वश्रेष्ठ मानव है,
अत्याचारी,
देशद्रोही मानव रूपी दानव है,
जय घोष करके तुम देश का
सम्मान करो।
अपना गौरव खोके न नीच का
काम करो,
दिल में लिए ज्वालामुखी
देश की रक्षा करो,
सबसे पहले अपना वतन फिर
दूजा सोच लो,
उठाके हाथ में तिरंगा जय
भारत कहो,
धर्म जाति के नाम पर न
झगड़ा करो।
छोड़ कर निराशा को हाथ आशा
का थाम लो,
छोड़ें न दामन सत्य का आज
ये प्रण धरो,
नवयुग को कदम बढ़े हैं इनको
तुम तेज़ करो,
देश का नाम ऊंचा ऐसी कोई
खोज करो,
देश की रक्षा के लिए हँसते
हुये मरो।
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