वो अपना बनाकर चला गया,
वो सपना दिखाकर चला गया,
पहले भीड़ में ले गया मुझको,
फिर तन्हा बनाकर चला गया|
वो राजदार था मेरा,
एक सह्गुजार था मेरा,
सारी दुनिया में अकेला वो,
एक एतबार था मेरा,
वो अपना अपना कहता रहा,
और फरेब जता कर चला गया|
मैं आशिक था अंधेरों का,
वो रौशनी बनकर आया,
कुछ हुए उजाले खुशियों के,
तो बन गया मेरा साया,
वो फूंक मारकर मुस्काया,
और उजाले बुझाकर चला गया|
दिल के सारे दर्द मैं,
चुपचाप सहकर जीता था,
अपनी तन्हाई के आंसू,
मुस्कुरा के पीता था,
वो बन के आंसू आंख का,
मुझे रुलाकर चला गया|
मैं खामोश था और दिल के,
ज़ज्बात मार चुका था मैं,
थोड़ी-थोड़ी करके आधी,
जिंदगी काट चुका था मैं,
वो बनके धड़कन सीने में,
दिल धड़का कर चला गया|
वो चला गया और छोड़ गया,
कुछ विरानियाँ कुछ सन्नाटे,
दुःख भरे लम्बे मौसम और,
करवट बदलती हुयी रातें,
वो सब कुछ जान गया लेकिन,
मेरा दर्द न जान सका,
वो सूरत देखके हुआ खफ़ा,
पर मन को न पहचान सका,
मुझे प्यार उससे कल भी था,
अब भी है, कल भी होगा,
ए खुदा बता मेरी चाहत का,
न्याय भला अब क्या होगा,
मैं तडपूंगा यूँ ही तन्हा या,
वो मिल जायेगा मुझको,
हाथ फैलाकर दर पे तेरे,
दुआ में मांग रहा जिसको,
क्यूँ संग जीने का मन में,
अरमां जगा कर चला गया|
वो प्यार भरे होठों से,
क्यूँ दिल दुखाकर चला गया
पहले भीड़ में ले गया मुझको,
फिर तन्हा बनाकर चला गया|
वो राजदार था मेरा,
एक सह्गुजार था मेरा,
सारी दुनिया में अकेला वो,
एक एतबार था मेरा,
वो अपना अपना कहता रहा,
और फरेब जता कर चला गया|
मैं आशिक था अंधेरों का,
वो रौशनी बनकर आया,
कुछ हुए उजाले खुशियों के,
तो बन गया मेरा साया,
वो फूंक मारकर मुस्काया,
और उजाले बुझाकर चला गया|
दिल के सारे दर्द मैं,
चुपचाप सहकर जीता था,
अपनी तन्हाई के आंसू,
मुस्कुरा के पीता था,
वो बन के आंसू आंख का,
मुझे रुलाकर चला गया|
मैं खामोश था और दिल के,
ज़ज्बात मार चुका था मैं,
थोड़ी-थोड़ी करके आधी,
जिंदगी काट चुका था मैं,
वो बनके धड़कन सीने में,
दिल धड़का कर चला गया|
वो चला गया और छोड़ गया,
कुछ विरानियाँ कुछ सन्नाटे,
दुःख भरे लम्बे मौसम और,
करवट बदलती हुयी रातें,
वो सब कुछ जान गया लेकिन,
मेरा दर्द न जान सका,
वो सूरत देखके हुआ खफ़ा,
पर मन को न पहचान सका,
मुझे प्यार उससे कल भी था,
अब भी है, कल भी होगा,
ए खुदा बता मेरी चाहत का,
न्याय भला अब क्या होगा,
मैं तडपूंगा यूँ ही तन्हा या,
वो मिल जायेगा मुझको,
हाथ फैलाकर दर पे तेरे,
दुआ में मांग रहा जिसको,
क्यूँ संग जीने का मन में,
अरमां जगा कर चला गया|
वो प्यार भरे होठों से,
क्यूँ दिल दुखाकर चला गया
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