मेरी मौत को वो शादी समझ रहे हैं,
दिलों की तड़प को शहनाई समझ रहे हैं।
जब उठा मेरा जनाज़ा वो समझे उसे घुड़चढ़ी,
लोगों का झुंड जो देखा वो समझे बारात चली।
रुक गए सब जाके जब पहचाने से शमशान में,
वो समझे कि बैठ गए सब भोजन के पंडाल में।
आग लगी जब चिता को मेरी वो समझे फेरे पड़ रहे,
लोग वापस आए तो समझे बाराती आ गए।
दूल्हा-दुल्हन न दिखे उन्हें लोगों का क्रंदन सुना,
रोये बहुत वो याद करके जब पता चला मेरी मौत का॥
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