होते हैं जब दिल में ग़म खुशी बताया करता हूँ,
अश्क छुपने के लिए पलकें झुकाया करता हूँ।
आ जाती है जब कभी वो अचानक सामने,
देकर प्यार का वास्ता दिल को समझाया करता हूँ।
जिस गली में मोड पे मिलते थे हम कभी,
अब उन्हीं राहों को मैं तन्हा सजाया करता हूँ।
बागों में जितने फूल हैं छोड़ देता हूँ सबको,
अब तो बस कांटो का बिस्तर लगाया करता हूँ।
जब याद उसकी आकर मन को सताती है हद से,
जाग कर रातों को मैं गज़लें बनाया करता हूँ॥
अश्क छुपने के लिए पलकें झुकाया करता हूँ।
आ जाती है जब कभी वो अचानक सामने,
देकर प्यार का वास्ता दिल को समझाया करता हूँ।
जिस गली में मोड पे मिलते थे हम कभी,
अब उन्हीं राहों को मैं तन्हा सजाया करता हूँ।
बागों में जितने फूल हैं छोड़ देता हूँ सबको,
अब तो बस कांटो का बिस्तर लगाया करता हूँ।
जब याद उसकी आकर मन को सताती है हद से,
जाग कर रातों को मैं गज़लें बनाया करता हूँ॥
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