मजबूर हूँ मैं कितना ये बता नहीं सकता,
कि मुझसे अपने हाल पे रोया नहीं जाता।
दाग लगाए हैं तूने मुझ पर बेवफाई के,
आंसुओं से भी दामन धोया नहीं जाता।
कैसे समझाऊँ तुम्हें जिन्हें दिल से चाहते हैं,
समझ कर उनको गैर खोया नहीं जाता।
हर अश्क कहता है मेरा आँखों में तू है,
भारी हैं पलकें रातों को सोया नहीं जाता।
बहुत कठिन राह इश्क़ की इतना समझ लो दोस्त,
चाहत के मोतियों को यूं ही पिरोया नहीं जाता।
भरना पड़ता है पहले रंग असलियत का,
सपना यूं ही कोई ‘सुनील’ सँजोया नहीं जाता।
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