Saturday, June 23, 2018

Bachpan ka Geet - बचपन का गीत

क्या दिन थे वो अलबेले
क्या दिन थे वो दीवाने,
खेलते रहते थे हम दिनभर,
थे सबसे अनजाने।

दिनभर घूमे इधर उधर,
की बड़ी शैतानी,
चोट लगी जो दर्द हुआ तो,
याद आ गई नानी।
थक गए जब हम दंगा करके बैठ गए सुस्ताने।

खेल खेल में झगड़ा हुआ तो,
उसको मार लगाई,
गुस्से में आकर उसने भी,
तिरछी आँख दिखाई,
मारने को जैसे वो आया भाई को लगे बुलाने।

शाम को जब हम खेलके आए,
मिट्टी में थे सने हुये,
बापू ने पीटा था हमको,
माँ ने भी डांटा था हमें,
थोड़ी देर तो चुप बैठे फिर बन गए मस्ताने।

याद आती हैं जब हमको,
अपनी वो शैतानियाँ,
कभी कभी होती हैं हमको,
खुद पे बड़ी हैरानियाँ,
वक़्त वो बीत चुका है अब हम हो गए सयाने।

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