जब गली के मोड़ पर याद तेरी आती है,
जाने क्यूँ नज़र मेरी धुंधली हो जाती है।
सोचता हूँ बैठकर जब मैं तेरे बारे में,
एक गुलाबी मुस्कुराहट होठों पे छा जाती है।
जब भी तन्हा होता हूँ इस दुनिया की भीड़ में,
हँसती हुई तू मेरे सामने आ जाती है।
साँसे रुक जाती हैं मेरी दिल भी खामोश होता है,
पलकों को झुका कर जब तू धीरे से शर्माती है।
सोचता हूँ बैठकर जब मैं तेरे बारे में,
एक गुलाबी मुस्कुराहट होठों पे छा जाती है।
जब भी तन्हा होता हूँ इस दुनिया की भीड़ में,
हँसती हुई तू मेरे सामने आ जाती है।
साँसे रुक जाती हैं मेरी दिल भी खामोश होता है,
पलकों को झुका कर जब तू धीरे से शर्माती है।
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