मैं धूप का मुसाफ़िर हूँ,
ज़रा छाँव तो दे दो,
मैं भटका सा राही हूँ,
अंजाम तो दे दो,
दे दो मुझे सहारा और
संभाल लो मुझको,
अंधेरो के शहर से
निकाल लो मुझको,
इक बार तार लो मुझको
हर फ़र्ज़ निभा लूँगा,
अगले जन्म में ही सही
सारे कर्ज चुका दूंगा ।
ज़रा छाँव तो दे दो,
मैं भटका सा राही हूँ,
अंजाम तो दे दो,
दे दो मुझे सहारा और
संभाल लो मुझको,
अंधेरो के शहर से
निकाल लो मुझको,
इक बार तार लो मुझको
हर फ़र्ज़ निभा लूँगा,
अगले जन्म में ही सही
सारे कर्ज चुका दूंगा ।
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