मैं मुस्कुराऊं कैसे अब गुनगुनाऊँ कैसे ।
कैसे भला मैं कह दूँ क्यूँ रो रहा हूँ मैं,
किस डर में खुली आँखों से सो रहा हूँ मैं,
मैं अपने डर की बातें ऐसे सुनाऊँ कैसे ।
दिल में है दर्द ......
बीती हुई वो बातें आती हैं याद मुझको,
आँखों में भरके पानी रुलाती हैं आज मुझको,
उन यादों की निशानी बोलो छुपाऊँ कैसे
दिल में है दर्द ......
मैं मुस्कुराऊं कैसे अब गुनगुनाऊँ कैसे ।
दिल में है दर्द कितना सबको बताऊँ कैसे ।
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