Saturday, July 21, 2018

धूप का मुसाफ़िर | Dhoop ka musafir

मैं धूप का मुसाफ़िर हूँ,
ज़रा छाँव तो दे दो,
मैं भटका सा राही हूँ,
अंजाम तो दे दो,
दे दो मुझे सहारा और
संभाल लो मुझको,
अंधेरो के शहर से
निकाल लो मुझको,
इक बार तार लो मुझको
हर फ़र्ज़ निभा लूँगा,
अगले जन्म में ही सही
सारे कर्ज चुका दूंगा ।

Sunday, July 15, 2018

मैं मुस्कुराऊं कैसे... | Main Muskuraun Kaise...


मैं मुस्कुराऊं कैसे अब गुनगुनाऊँ कैसे ।   
दिल में है दर्द कितना सबको बताऊँ कैसे ।

कैसे भला मैं कह दूँ क्यूँ रो रहा हूँ मैं,
किस डर में खुली आँखों से सो रहा हूँ मैं,
मैं अपने डर की बातें ऐसे सुनाऊँ कैसे ।
दिल में है दर्द ......

बीती हुई वो बातें आती हैं याद मुझको,
आँखों में भरके पानी रुलाती हैं आज मुझको,
उन यादों की निशानी बोलो छुपाऊँ कैसे
दिल में है दर्द ......

मैं मुस्कुराऊं कैसे अब गुनगुनाऊँ कैसे ।
दिल में है दर्द कितना सबको बताऊँ कैसे ।

Thursday, July 5, 2018

हवाओं को भी हैं याद नजारे - Hawaon ko bhi hain yaad najaare

हवाओं को भी हैं याद नजारे,
तेरा मुझे देख कर मुस्कुराना,
दिन भर बजती पायल वो छम छम,
तेरी अदाओं पे पे मेरा गीत गाना।

कितना प्यारा प्यारा था वो ज़माना,
जिसमें हम थे बस हम ही थे,
जरा भी फ़िक्र कहाँ थी किसी की,
सारे नामुमकिन भी मुमकिन थे,
तुझसे बस यूं ही रूठ जाना,
फिर प्यार से तेरा मानना।
दिन भर बजती पायल वो ...

कि चुपके से वक़्त बदला बदली दुनियाँ
दूर होते ही हो गए बेगाने,
पहले मुझसे थी दुनिया तुम्हारी,
फिर बीच में आ गए जमाने,
खता थी मेरी तो बस इतनी,
तुझको अपना खुदा था माना।
दिन भर बजती पायल वो ...

हौले हौले करके किनारे,
तुम चल दिये हाथ छुड़ा के,
जाने खो गए किन रस्तों पे तुम,
सारी कसमें वादे भुला के,
मुश्किल लाग्ने लगी जिंदगी ये,
साँसो का रुकने लगा आना जाना।
दिन भर बजती पायल वो ...

Saturday, June 30, 2018

जब गली के मोड़ पर

जब गली के मोड़ पर याद तेरी आती है,
जाने क्यूँ नज़र मेरी धुंधली हो जाती है।

सोचता हूँ बैठकर जब मैं तेरे बारे में,
एक गुलाबी मुस्कुराहट होठों पे छा जाती है।

जब भी तन्हा होता हूँ इस दुनिया की भीड़ में,
हँसती हुई तू मेरे सामने आ जाती है।

साँसे रुक जाती हैं मेरी दिल भी खामोश होता है,
पलकों को झुका कर जब तू धीरे से शर्माती है।